क्या आत्महत्या करना अपराध है?

14 जून को बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत (Sushant Singh Rajput) की मौत मुंबई स्थित बांद्रा के अपार्टमेंट में हो गई थी. शुरुआत में इस मामले की जांच मुंबई पुलिस कर रही थी. मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने इसे आत्महत्या (Suicide) करार दे दिया था.

लेकिन सुशांत की मौत के मामले में संदेह के चलते जांच सीबीआई (CBI) को सौंपा गया. सीबीआई के साथ इस मामले में धोखाधड़ी से जुड़े मामले की जांच ईडी (ED) कर रही है.

जांच के दौरान इस मामले में ड्रग्स कनेक्शन का मामला भी सामने आया है. इसकी जांच एनसीबी (NCB) कर रही है. रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) को जेल में डाल दिया गया है.

आपको बता दें, सुशांत की मौत के बाद सुशांत के पिता के.के. सिंह (K.k.Singh) ने रिया के खिलाफ पटना में एफआईआर दर्ज कराया था. इस एफआईआर (FIR) में लिखा था कि रिया ने सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाया. रिया ने सुशांत की हत्या की है.

इसके साथ ही यह भी इल्ज़ाम लगाया था कि रिया ने सुशांत को उनके परिवार से दूर रखा था.

बात दें, आत्महत्या करना या आत्महत्या करने की कोशिश करना और आत्महत्या के लिए उकसाना क़ानून के तहत अपराध है. लेकिन इसी बीच कई लोगों का कहना है कि तनाव से मुक्ति पाने के लिए आत्महत्या करना अभिव्यक्ति की आज़ादी है.

यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद-19 (Article-19) के तहत मिला है. इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. याचिका के मुताबिक़ सुप्रीम कोर्ट को इस विवाद को सुलझाना है.

भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code), 1986 की धारा-306  के तहत अगर किसी व्यक्ति के उकसाने पर कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है, तो जिस व्यक्ति ने उकसाया है, वह अपराधी है.

अपराधी को 1 से 10 साल तक के लिए जेल की सज़ा हो सकती है. इसके साथ ही जुर्माना भी भरना पड़ेगा.

भारतीय दंड संहिता की धारा-309 के मुताबिक आत्महत्या करने का प्रयास करना अपराध है. इसके लिए सजा का प्रावधान है.

अपराधी को एक साल तक के लिए जेल हो सकती है. साथ ही साथ जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.

हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 की धारा-115 ने औपनिवेशिक दंड संहिता को खत्म करने की मांग की है. इसमें कहा गया है कि आईपीसी की धारा-309 के बावजूद, अगर कोई भी व्यक्ति जो आत्महत्या करने का प्रयास करता है, उसे तब तक मान लिया जाएगा, जब तक उस व्यक्ति को गंभीर तनाव न हो.

ऐसे व्यक्ति पर आईपीसी की धारा-309 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जाएगा और उसे किसी भी तरह की सजा नहीं दी जाएगी.

आत्महत्या करने का प्रयास आईपीसी (IPC) की धारा-309 के तहत दंडनीय अपराध है। हालांकि, हम पाते हैं कि मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 की धारा-115 आईपीसी की धारा-309 पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है.

मैंने स्नातक वनस्पति विज्ञान, मास्टर राजनीतिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध, एलएलबी की पढ़ाई मुंबई विश्वविद्यालय से की है. इसके साथ ही ब्राॅडकास्ट जर्नलिस्म का कोर्स भी किया है. कानून और राजनीति से लगाव, पर्यावरण से प्रेम और अंतरराष्ट्रीय खबरों में दिलचस्पी है.